गुरुनानक अपार्टमेंट में बिजली चोरी का खेल, कंपनी को लाखों के राजस्व का नुकसान

गुरुनानक अपार्टमेंट में बिजली चोरी का खेल, कंपनी को लाखों के राजस्व का नुकसान

ग्वालियर। शहर के सिकंदर कम्पू स्थित गुरुनानक अपार्टमेंट में बिजली कंपनी के आउटसोर्स कर्मचारी सोनू छावड़ा और क्षेत्रीय सहायक अभियंता (एई) गोपेश उपाध्याय पर मिलीभगत से बड़े पैमाने पर बिजली चोरी कराने और कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुँचाने के गंभीर आरोप लगे हैं। अपार्टमेंट के निवासियों ने इस संबंध में उच्चाधिकारियों को लिखित शिकायत भेजकर विस्तृत जाँच और कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

शिकायत के अनुसार, अपार्टमेंट में रहने वाले सोनू छावड़ा के लाइट के बिल न भरने के बाद भी बिजली विभाग ने उनका मीटर नहीं काटा है, जबकि उसी अपार्टमेंट में बिल न भरने पर फ्लैट नंबर 205 की लाइट काट दी गई है। आरोप है कि कनेक्शन कटने के बाद भी सोनू छावड़ा अपने निजी मीटर से अवैध वायरिंग के माध्यम से फ्लैट नंबर 205 को लगातार बिजली सप्लाई कर रहा है और बदले में सम्बन्धित लोगों से मोटी नकद राशि वसूलता है। इस अवैध आपूर्ति के कारण कंपनी को बिल और जुर्माना वसूलने का मौका नहीं मिल पा रहा, जिससे हर महीने राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है।

स्थायी निवासियों का कहना है कि पूरे मामले की जानकारी और वीडियो साक्ष्य क्षेत्रीय एई गोपेश उपाध्याय और सम्बद्ध अधिकारियों को कई बार उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। जब इस संबंध में निवासियों ने एई गोपेश उपाध्याय का पक्ष जानना चाहा, तो उनका कहना था कि सोनू छावड़ा यदि अपने मीटर से किसी अन्य को लाइट दे रहा है तो वह चोरी नहीं, बल्कि मीटर एक्सटेंशन का मामला है और वे उसे केवल इतना कहेंगे कि आगे से ऐसा न करे; चोरी का कोई केस सोनू पर नहीं बनता। निवासियों के मुताबिक, इस तरह की प्रतिक्रिया और अब तक ठोस कार्रवाई न होने से एई और आउटसोर्स कर्मचारी के बीच सांठगांठ की आशंका और भी गहरी हो गई है।

निवासियों ने माँग की है कि सोनू छावड़ा और एई गोपेश उपाध्याय की भूमिका की उच्चस्तरीय जाँच कर तत्काल निलंबन सहित विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई की जाए, सभी अवैध कनेक्शन तत्काल विच्छिन्न कर अलग‑अलग बकाया और जुर्माना वसूला जाए तथा क्षेत्र में विशेष फुजिहक दल बनाकर नियमित जाँच की स्थायी व्यवस्था की जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र और उचित कार्रवाई नहीं की गई तो यह मामला न्यायालय और नियामक संस्थाओं के समक्ष भी उठाया जाएगा।

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