क्राइमग्वालियरमध्यप्रदेश

ग्वालियर में कानून के रखवालों पर ही कानून तोड़ने के गंभीर आरोप लगे हैं। एक ऐसे मामले में कोर्ट ने बड़ा संज्ञान लिया है, जिसमें पुलिस अधिकारियों पर न केवल अवैध वसूली और डकैती जैसे संगीन आरोप लगे हैं, बल्कि सबूत मिटाने के लिए CCTV फुटेज डिलीट करने का मामला भी सामने आया है। कोर्ट ने तत्कालीन एसपी, तत्कालीन थाना प्रभारी सहित चार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज कर नोटिस जारी किये हैं

यह पूरा मामला थाटीपुर थाना क्षेत्र का है,जहां अनूप नाम के व्यक्ति के भाई के खिलाफ धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था,इस प्रकरण में चार फरियादी थे,जिनका बाद में आपसी राजीनामा होना था,क्योंकि मामला पैसों के लेन-देन से जुड़ा था।फरियादियों ने खुद जांच अधिकारी यानी इंवेस्टिंग ऑफिसर को यह जानकारी दी कि समझौता हो चुका है १और आरोपी का नाम एफआईआर से हटाया जाए।लेकिन आरोप है कि यहीं से शुरू हुआ पुलिसिया वसूली का खेल,कोर्ट में दायर शिकायत यानी परिवाद के मुताबिक, जांच अधिकारी अजय सिकरवार ने फरियादियों से भी पैसों की मांग की और अनूप के भाई पक्ष से भी रकम मांगी,बताया गया है कि अनूप की ओर से पहले ही करीब 4 लाख 90 हजार रुपए IO को दिए जा चुके थे,लेकिन जब पुलिस अधिकारी को यह एहसास हुआ कि मामला बड़े पैसों का है, तब 24 दिसंबर 2023 को अनूप को कथित रूप से बंधक बनाकर उसके घर से साढ़े 9 लाख रुपए उठवाए गए।आरोप है कि पुलिस आरक्षक संतोष वर्मा के जरिए यह रकम ली गई।इसी दौरान मामले में शामिल एक अन्य महिला चंद्रलेखा जैन के घर से भी करीब 15 लाख रुपए उठवाए गए।दोनों जगहों से कुल 30 लाख रुपए लिए जाने का आरोप है। इतना ही नहीं, आरोप है कि इन पैसों के अतिरिक्त फरियादियों को रुपये देने का दबाव भी बनाया गया।इसके बाद अनूप ने तत्कालीन एसपी ग्वालियर राजेश चंदेल से शिकायत की,लेकिन जैसे ही मामला थाने तक पहुंचा, शिकायतकर्ता अनूप को ही इस प्रकरण में आरोपी बना लिया गया।मामले में जमानत मिलने के बाद अनूप ने कोर्ट में परिवाद दायर किया, जिसमें तत्कालीन एसपी राजेश चंदेल, थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ यादव, जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर अजय सिकरवार और आरक्षक संतोष वर्मा को आरोपी बनाया गया।परिवाद के साथ कोर्ट में एक महत्वपूर्ण आवेदन भी पेश किया गया,जिसमें 24 और 25 दिसंबर 2023 की CCTV फुटेज सुरक्षित मंगवाने की मांग की गई थी,शिकायतकर्ता का दावा था कि उसी फुटेज में पैसे से भरे लाल रंग के बैग और पूरी लेन-देन की घटनाएं कैद हैं,लेकिन जब कोर्ट ने CCTV फुटेज पेश करने के पुलिस को आदेश दिए, तब पुलिस की ओर से जवाब दिया गया कि फुटेज उपलब्ध नहीं है,इसके बाद कोर्ट ने कारण बताओ नोटिस जारी किया।रेडियो उप पुलिस अशिक्षक की जांच में सामने आया कि 3 जनवरी 2024 के पहले की CCTV फुटेज डिलीट कर दी गई थी। ऐसे में कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है क्योंकि आरोप उन लोगों पर हैं जो स्वयं कानून के रक्षक हैं और कानून की बारीकियों से भली-भांति परिचित हैं।कोर्ट ने माना कि पहले अपराध किया गया और बाद में सबूत मिटाने का प्रयास भी किया गया।इसी आधार पर विशेष न्यायालय डकैती ने चारों आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 392, 201, 120-B तथा एमपीडीपी एक्ट की धारा 11/13 के तहत प्रकरण दर्ज किया,फिलहाल इस मामले ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि कानून के रखवालों पर लगे इन गंभीर आरोपों में आगे क्या कार्रवाई होती है।

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