ग्वालियर

क्या भ्रूण लिंग परीक्षण के आरोपी पंकज तिवारी की संपत्ति की जांच करा पयेगा प्रशासन

अवैध कमाई का पैसा जमीनी कारोबार में लगाकर पत्नी और भाई के नाम से करोड़ों के भूखंड खरीदकर की प्लाटिंग

मुरैना । क्या भ्रूण लिंग परीक्षण के मामले में पकड़े गए फरार आरोपी पंकज तिवारी की संपत्ति की जांच करा पाएगी मुरैना पुलिस, स्वास्थ्य विभाग या समाजसेवी ? यह सवाल इसलिए जायज है क्योंकि अगर विश्वस्त सूत्रों की मानें तो आरोपी पंकज ने गलत तरीके से की गई अवैध कमाई का पैसा जमीनी कारोबार में लगाकर अपनी पत्नी नेहा और भाई नीरज के नाम से करोड़ों के भूखंड खरीदकर न केवल प्लाटिंग कर डाली है बल्कि करोड़ों की कमाई कर अकूत संपत्ति एकत्रित भी कर ली है ।
इतना ही नहीं फरार होने के बाद भी उसकी जमीनों की रजिस्ट्रियां लगातार कैसे होतो रही ? लगातार प्लाट बेचे जा रहे थे यहां तक कि बिल्डकॉन कंपनी खोलने की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी । ऐसा सूत्र बताते हैं ।

संभागीय मुख्यालय से करीब दस किलो मीटर दूरी पर जौरा रोड़ पर स्थित जाफराबाद, मुंगावली, कुम्हेरी, उड़ेहड़ी, हड़बांसी सहित कई इलाकों में पंकज, उसकी पत्नी नेहा तथा भाई के नाम से सैकड़ों बीघा जमीन खरीदकर प्लाटिंग की जा चुकी है । इनके साथ में पुष्पेंद्र, राहुल शर्मा, राम सनेही, भीम किरार जैसे दर्जन भर व्यापारी पार्टनर हैं । चर्चा है कि मुरैना पुलिस के अंदर बैठे कुछ लोग आरोपी की मदद करते हैं तथा तथाकथित सत्ताधारी नेता का वरदहस्त होने के कारण ग्वालियर, मुरैना, बांसी, जौरा, धौलपुर, जैसे शहरों में मकान, कोठी तथा आधा दर्जन चार पहिया वाहन सहित करोड़ों की संपत्ति अर्जित की गई है । लेकिन यह सच है तो इस बात की जांच होना अति आवश्यक है अन्यथा कोई भी अपराधी अवैध तरीके से कमाई हुई दौलत को जमीनी कारोबार में लगाकर दूध का धुला बन सकता है ।
पुष्टि इस बात की है कि फरार आरोपी पंकज तिवारी मुरैना जिले में कुम्हेरी, हड़बांसी, मुंगावली, जाफराबाद, उरहेरी सहित दर्जनों स्थान पर जमीन लेकर अब भी बिल्डिंग कॉन्ट्रैक्शन और प्लाटिंग कर रहा है । जाफराबाद में अपने एवं अपनी पत्नी नेहा के नाम से तथा ग्राम कुम्हेरी में कई स्थानों पर सिंचित जमीन खरीदकर प्लाट बनाकर बेची गई है जिसमें पंकज तिवारी पुत्र रामौतार तिवारी के साथ उसके भाई के साथ अन्य सहयोगी शामिल होने की चर्चा जोरों पर हैं । लेकिन अब देखना यह है कि बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी तथा सिस्टम में बैठे दलाल इनका कब तक संरक्षण कर पाएंगे ? या कहीं ऐसा तो नहीं कि ईमानदारी का ढिंढोरा पीटने वाली पुलिस, कानून के रक्षक एवं ख़ाखी वाले आला अफसर भी इस अवैध कमाई से अपना हिस्सा लेकर मामले को रफा दफा कर देंगे ? क्योंकि मुरैना, ग्वालियर के स्वास्थ्य महकमे सहित समाज सेवियों में भी काना फूसी है कि आरोपी के कई सहयोगी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं जो न केवल स्लीपर सेल्स के रूप में काम कर रहे हैं बल्कि अपने आका पंकज को बाहर निकालने के लिए राजधानी में बैठे सत्ताधीशों,सियासद्दानों की चौखट पर दस्तक दे रहे हैं तथा उसे निकालने के लिए पूरी शिद्दत के साथ हर सम्भव प्रयास किए जा रहे हैं ।

 

विवेक तिवारी
9009928822

संपादक

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