
बाइक भी उसी के नाम कागजातों में दर्ज है। फाइनेंस के लिए हितग्राही का बालिग होना जरूरी है लेकिन फरियादी सौरभ नरवरिया नाबालिग था इसलिए उसने अपने ममेरे भाई सचिन के नाम से इस बाइक को खरीदा था ।लेकिन अपने नाम की बाइक आते ही सचिन के मन में खोट आ गया। सचिन नरवरिया ने अपने ममेरे भाई की सौरभ नरवरिया की बाइक को चुरा लिया था।सौरभ नामक ये फरियादी पीतांबरा कॉलोनी में रहता है। जबकि पुलिस ने सचिन नरवरिया को नारायण विहार कॉलोनी से गिरफ्तार किया है। वहां सचिन अपने मामा के घर पर था ।मूलत: सचिन भिंड का रहने वाला है।कहने को ये बाइक चोरी की मामूली घटना थी।परन्तु इस मामले का उल्लेख इसलिए किया गया था कि यह भारतीय न्याय संहिता के तहत पहला मामला दर्ज हुआ था। इसकी जानकारी देश के गृहमंत्री अमित शाह ने अपनी एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान दी थी। बाइक हड़पने के लिए आरोपी सचिन ने डुप्लीकेट चाबी बनवाई और उस बाइक का ताला तोड़कर उसे चुरा लिया।