बिजली विभाग में बड़ा घोटाला! सोनू छावड़ा पर अवैध वसूली और एई स्तर की शह के आरोप
कई बार शिकायतें एई स्तर तक पहुँचने के बाद भी उस समय सोनू पर कोई चोरी का मामला दर्ज नहीं किया गया। इससे विभाग की निष्क्रियता और अंदरूनी सांठगांठ पर पहले ही सवाल खड़े हो चुके थे।

ग्वालियर। शहर के बिजली विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। पहले जहाँ आउटसोर्स कर्मचारी सोनू छावड़ा पर अवैध कनेक्शन व बिजली चोरी करवाने का मामला उजागर हुआ था, वहीं अब यही कर्मचारी ‘स्मार्ट मीटर लगाने’ के नाम पर वसूली करने, शिकायतें दबाने और विभागीय सिस्टम का दुरुपयोग करने के आरोपों में घिर गया है।
सूत्रों और उपभोक्ताओं से मिली जानकारी के अनुसार, सोनू छावड़ा पहले गुरुनानक अपार्टमेंट क्षेत्र में बिजली कंपनी का कार्य देखता था। वहाँ बिजली बिल न भरने वाले फ्लैट नंबर 205 का कनेक्शन काटे जाने के बाद उसने अपने निजी मीटर से अवैध वायरिंग करके बिजली सप्लाई शुरू कर दी थी और बदले में सम्बंधित उपभोक्ताओं से नकद वसूली करता था। इस अवैध गतिविधि से विभाग को हर महीने हजारों का राजस्व नुकसान हुआ।
कई बार शिकायतें एई स्तर तक पहुँचने के बाद भी उस समय सोनू पर कोई चोरी का मामला दर्ज नहीं किया गया। इससे विभाग की निष्क्रियता और अंदरूनी सांठगांठ पर पहले ही सवाल खड़े हो चुके थे।
अब इसी सोनू छावड़ा पर नया आरोप लगा है कि वह लोगों के घर‑घर जाकर खुद को बिजली विभाग का प्रतिनिधि बताता है और कहता है कि ऊपर से आदेश आया है — “पुराना मीटर हटाकर नया स्मार्ट मीटर लगाना है”। जब उपभोक्ता इस पर सवाल उठाते हैं, तो वह कहता है – “यह ऊपर से एई साहब का आदेश है, मैं कुछ नहीं कर सकता।”
निवासियों के अनुसार, यदि कोई उपभोक्ता नया मीटर लगाने से इंकार करता है तो सोनू कहता है – “अगर कुछ इंतजाम कर दो, तो मैं ऊपर बात करके तुम्हारे यहाँ मीटर नहीं लगवाऊँगा।” बताया जा रहा है कि इस तरह वह ₹500 से ₹2000 तक की रकम बिना रसीद के वसूलता है।
इस दौरान एक वीडियो सोशल मीडिया (Facebook) पर वायरल हुआ था, जिसमें वह कथित रूप से यह कहता दिखा कि “मुझे एई साहब ने भेजा है स्मार्ट मीटर लगाने के लिए।” वीडियो फैलने के बावजूद विभाग ने अभी तक कोई खुली जाँच शुरू नहीं की है।
इस बीच, जब कई उपभोक्ताओं ने धोखाधड़ी और अवैध वसूली को लेकर एमपी सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दी । आरोप यह भी है कि इन शिकायतों को आगे बढ़ाने के बजाय सोनू छावड़ा ने कथित रूप से अपने वरिष्ठ अधिकारी की लॉग‑इन आईडी का उपयोग कर पोर्टल पर दर्ज कई शिकायतों को स्वयं ही “निराकृत” दिखाकर बंद करा दिया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिस सिस्टम का उद्देश्य पारदर्शी शिकायत निवारण है, उसी का दुरुपयोग कर शिकायतें दबा दी गईं, जबकि नियमों के अनुसार लंबित शिकायतों को उच्च स्तर तक एस्केलेट होना चाहिए यह घटना विभाग की आंतरिक स्वच्छता पर गंभीर सवाल उठाती है।
संबंधित एई स्तर के अधिकारी तक बार‑बार जानकारी पहुँचने के बावजूद न तो सोनू के विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई और न ही फर्जी वसूली या तकनीकी दुरुपयोग की जांच शुरू की गई। इस पूरे मामले पर विभाग की चुप्पी उपभोक्ताओं के बीच असंतोष का कारण बन रही है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बिजली वितरण कंपनी के उच्च प्रबंधन से मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच करवाई जाए, सोनू छावड़ा की भूमिका और एई गोपेश उपाध्याय की मिलीभगत की निष्पक्ष जांच की जाए, वायरल वीडियो का तकनीकी परीक्षण कराया जाए, सोनू छावड़ा की भूमिका के साथ‑साथ संबंधित एई की जिम्मेदारी भी तय की जाए और यदि आरोप सही पाए जाएँ तो राजस्व हानि की भरपाई, अवैध वसूली की राशि की वापसी तथा भविष्य के लिए पारदर्शी निगरानी तंत्र लागू किया जाए।
DE और AE से उनका पक्ष जानने के लिए कई बार प्रयास किया गया पर उन्होंने हमारे प्रतिनिधि का फोन नहीं उठाया। इतना ही नहीं शिकायतकर्ताओं को एवं उनके सहयोगियों को बार-बार इस मामले से दूर रहने की धमकी मिल रही है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार स्थानीय उपभोक्ताओं और स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा किए गए वीडियो की हम पुष्टि नहीं करते। सभी पक्षों को जांच का अवसर दिया जाना चाहिए



